बाबा लाएंगे क्रांति !

  • सर्वाधिक मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड मायावती के नाम
  • उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती को छोड़ मुख्यमंत्री रहते दुबारा मुख्यमंत्री कोई नहीं हुआ 

लखनऊ, शुक्रवार 14जनवरी 2022 (सूवि) पौष मास शुक्ल पक्ष द्वादशी शिशिर ऋतु २०७८ आनन्द नाम संवत्सर। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 के परिणामों के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए राजनीत के खिलाड़ी पिच पर उतर चुके हैं। वह बाबा (योगी आदित्यनाथ) को कुर्सी से बेदखल कर उस पर काबिज होना चाहते हैं। 

इसके लिए वह अपने राजनीतिक शब्दों के बैट्स से धुंआधार बल्लेबाजी कर रहे हैं। चाहे वह सपा, कांग्रेस, बसपा अथवा अन्य दल सभी मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए जोरआजमाइश कर रहे हैं। वह खुले मंच से बाबा को चुनौती दे रहे हैं और कह रहे हैं। उनकी (बाबा की) चलाचली की बेला है। उत्तर प्रदेश का चुनाव तो इतना दिलचस्प हो रखा है कि यहां पर केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य प्रदेशों की क्षेत्रीय पार्टियों के प्रमुख भी विधानसभा चुनाव 2022 में बाबा को बेदखल करने के लिए उतर चुके हैं। चाहे वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हो, एनसीपी के शरद पवार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, रिपब्लिकन पार्टी के रामदास आठवले, आंध्रप्रदेश एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी अथवा शिवसेना के संजय राउत हों। सभी मुख्यमंत्री की कुर्सी से बाबा को हटाने के लिए सपा, बसपा, कांग्रेस, प्रसपा, भाकियू को बूस्टर डोज दे रहें, क्योंकि उन्हें पता है, उत्तर प्रदेश में अभी उनका जनाधार इतना नहीं है कि वह तीन चौथाई बहुमत प्राप्त कर सके हैं। उनका केवल मकसद है कि किसी तरह से बाबा को मुख्यमंत्री की कुर्सी से गिरा दें। मगर बाबा भी हार मानने वाले नहीं है। उन्होंने भी भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व कार्ड खेल दिया है। अयोध्या से वह खुद चुनाव लड़ने जा रहे हैं। अपने भाषणों में काशी विश्वनाथ बखान करते वह थकते नहीं हैं। मथुरा के बारे में वह कहते हैं, कि जिसमे दम होगा। वह ही बनायेगा। जय श्रीराम का नारा और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण उनके हर उदबोधन में रहता है। 

हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति का यह कार्ड अगर काम कर गया तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के नतीजे जब 10 मार्च को आएंगे तो बाबा बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए कुर्सी पर दुबारा रिपीट करेंगे। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब तक हुए मुख्यमंत्रियों का इतिहास उठाकर देखें तो मायावती के अलावा कोई भी मुख्यमंत्री रहते हुए कुर्सी पर रिपीट नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक चार बार मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड मायावती के नाम दर्ज है। यूपी में अब तक 20 जन मुख्यमंत्री हुए हैं। इनके अलावा तीन राज्य के कार्यकारी मुख्यमंत्री भी रहे हैं जिनका कार्यकाल बहुत छोटा रहा है।

यूपी में अब तक हुए मुख्यमंत्री

  1. गोविंद वल्लभ पंत 1950
  2. सम्पूर्णानंद 1954
  3. चंद्रभानु गुप्ता 1960
  4. सुचेता कृपलानी 1963
  5. चंद्रभानु गुप्ता 1967
  6. चरण सिंह1967
  7. चंद्रभानु गुप्ता 1969
  8. चरण सिंह 1970
  9. त्रिभुवन नारायण सिंह 1970
  10. कमलापति त्रिपाठी 1971
  11. हेमवती नंदन बहुगुणा 1973
  12. नारायण दत्त तिवारी 1976
  13. राम नरेश यादव 1977
  14. बनारसी दास 1979
  15. विश्वनाथ प्रताप सिंह 1980
  16. नारायणदत्त तिवारी 1984
  17. वीर बहादुर सिंह 1985
  18. नारायणदत्त तिवारी 1988
  19. मुलायम सिंह यादव 1989
  20. कल्याण सिंह 1991
  21. मुलायम सिंह यादव 1993
  22. मायावती 1995
  23. मायावती 1997
  24. कल्याण सिंह 1997
  25. रामप्रकाश गुप्त 1999
  26. राजनाथ सिंह 2000
  27. मायावती 2002
  28. मुलायम सिंह यादव 2003
  29. मायावती 2007
  30. अखिलेश यादव 2012
  31. योगी आदित्यनाथ 2017

लेखक - अनुपम सिंह, वरिष्ठ पत्रकार (लगभग 20 वर्षों तक दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और अमर उजाला से पत्रकारिता) 

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